क्या मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नाद साधना को प्रभावित करते हैं? (kya mobail aur ilektronik divais naad saadhana ko prabhaavit karate hain?)

 आज के युग में मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन जब हम नाद योग (Naad Yoga) या अनाहत नाद (Anahata Naad) की साधना करते हैं, तो यह सवाल अक्सर उठता है:

क्या ये डिवाइस हमारी साधना में बाधा बन सकते हैं?

उत्तर है — हां, और कई स्तरों पर।


🔌 इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस कैसे प्रभावित करते हैं?

1. Electromagnetic Waves (EMFs):

मोबाइल टावर, WiFi, Bluetooth जैसे उपकरण निरंतर electromagnetic radiation उत्पन्न करते हैं। ये सूक्ष्म तरंगें हमारे मस्तिष्क की अल्फा और थीटा वेव्स पर असर डालती हैं — वही तरंगें जो ध्यान की अवस्था में प्रबल होती हैं।

2. Auditory Distraction:

Notification sounds, background buzzing, या subtle humming noises — ये सब Inner Sound Perception में बाधा उत्पन्न करते हैं।

3. Mental Restlessness:

मोबाइल स्क्रॉलिंग या लैपटॉप का प्रयोग मस्तिष्क को सतह पर सक्रिय बनाए रखता है। इससे मन अंदर की ओर उतरने की योग्यता खो बैठता है।

4. Vata दोष में वृद्धि (from Ayurveda view):

प्राचीन दृष्टिकोण से देखें तो इलेक्ट्रॉनिक्स के अत्यधिक उपयोग से वात दोष (mental instability, restlessness) बढ़ता है — जो नाद साधना के विपरीत है।


🔇 समाधान क्या है?

साधना से पहले “Digital Silence” का अभ्यास करें:
कम-से-कम 30 मिनट पहले सभी डिवाइस बंद करें। Flight Mode पर्याप्त नहीं — बिजली स्रोत से दूर रखना श्रेष्ठ है।

EMF Protection Tools:
कुछ साधक Shungite stones, Orgonite, या EMF shielding fabrics का उपयोग करते हैं।

वायरलेस उपकरणों से दूरी बनाएं:
Wi-Fi routers, cordless phones, और smart watches को ध्यान स्थान से दूर रखें।

Natural Grounding:
साधना से पहले 5 मिनट मिट्टी या घास पर नंगे पाँव चलें — यह शरीर को EMF के प्रभाव से मुक्त करता है।


🤔 सामान्य प्रश्न (FAQs):

Q: क्या मोबाइल की बंद स्क्रीन भी प्रभाव डालती है?
A: हां, अगर मोबाइल ऑन है तो वह नेटवर्क के लिए रेडिएशन भेजता रहता है। इसलिए Switched Off या Far Away रखना बेहतर है।

Q: क्या Bluetooth earbuds से भी बाधा आती है?
A: हां, Bluetooth आधारित उपकरण subtle sound perception को बाधित करते हैं।

Q: ध्यान के बाद फोन का उपयोग कब करें?
A: कम-से-कम 10–15 मिनट बाद, ताकि नाद की ऊर्जा स्थिर हो सके।


🌟 साधक अनुभव:

📌 मनीषा (देहरादून):
"जब भी मैं मोबाइल दूर रखकर नाद पर ध्यान करती हूँ, तो ध्वनि अधिक गहराई से सुनाई देती है। एक बार ध्यान के बीच अचानक फोन vibrate हुआ, और मेरी पूरी स्थिति टूट गई। तभी से ध्यान से पहले फोन बंद करना मेरी आदत बन गई है।"

📌 राजेश (दिल्ली):
"मैंने EMF protection के लिए grounding शुरू किया। अब लगता है जैसे ध्यान करते समय कुछ अधिक natural महसूस होता है — जैसे मन स्वतः मौन में उतरता है।"


🧘‍♂️ Niran Bodhi Reflects:

"वर्षों पहले जब साधना शुरू की, तब मोबाइल फोन इतना प्रचलित नहीं था। लेकिन अब मैं स्वयं अनुभव करता हूँ कि एक subtle interference साधना की गहराई को रोकता है। जब मोबाइल और डिजिटल डिवाइस एक ओर रख दिए जाते हैं — केवल तब, आंतरिक मौन सच में सुना जाता है।"


📘 Learn More in the Book:

अगर आप जानना चाहते हैं कि डिजिटल जीवन के बीच भी नाद साधना कैसे संभव है, और कैसे subtle sound की दिशा में गहराई से बढ़ा जा सकता है, तो पुस्तक पढ़ें:

🕊️ अनाहत नाद से समाधि — ध्यान का सहज राजमार्ग
लेखक: निरन बोधी

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