अनाहत नाद को कैसे सुनें? ध्यान में प्रवेश के सरल उपाय

 

❖ भूमिका

मुझे कुछ सुनाई नहीं देता, मैं कोशिश कर रहा हूँ पर नाद नहीं आता।”

यह सवाल लगभग हर नाद योग साधक के मन में कभी न कभी आता है।
और इसका उत्तर है:

सुनना प्रयास से नहीं होता, बल्कि प्रतीक्षा से होता है।

इस पोस्ट में जानिए कि अनाहत नाद (अनहद नाद - Anahata Naad) को सुनने के लिए क्या-क्या सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं।


❖ 1. शांत वातावरण बनाएँ

  • अभ्यास के समय आसपास शोर न हो

  • मोबाइल, TV, बाहर की आवाजें बंद रखें

  • Ear plugs का उपयोग कर सकते हैं (अगर ज़रूरत हो)

🔸 जैसे ही बाहरी ध्वनियाँ कम होती हैं, भीतरी ध्वनि स्पष्ट होने लगती है।


❖ 2. कानों पर ध्यान केंद्रित करें

  • आँखें बंद करें

  • अपनी ध्यान शक्ति को कानों के भीतर ले जाएँ

  • वहाँ केवल सुनने की इच्छा रखें — कोई कल्पना नहीं

📌 टिप: शुरुआत में 5–10 मिनट केवल “सुनने” का अभ्यास करें — बिना अपेक्षा के।


❖ 3. ध्यानपूर्वक सुनना बनें

  • कुछ न करने की अवस्था में आना है

  • कोई मंत्र, कल्पना या ध्यान वस्तु की आवश्यकता नहीं

  • बस "सुनना" ही साधना है

“नाद को खोजा नहीं जाता — उसकी प्रतीक्षा की जाती है।”


❖ 4. शरीर को स्थिर रखें

  • कोई गति या हलचल न हो

  • शरीर की स्थिरता मन को स्थिर करती है

  • जैसे ही मन स्थिर होता है, अनहद नाद सुनाई देने लगता है


❖ 5. प्रारंभिक ध्वनियों को पहचानें

शुरुआत में नाद बहुत सूक्ष्म या मंद हो सकता है:

ध्वनि अनुभव        अर्थ
कंपन या झींगुर        ध्यान शुरू हो चुका है
टनाटन या घंटी जैसी ध्वनि        मन एकाग्र होने लगा है
वीणा, बांसुरी        चेतना का द्वार खुल रहा है

🌀 इन ध्वनियों पर ध्यान केंद्रित करते रहें — धीरे-धीरे वे बदलेंगी और गहराएँगी।


❖ 6. असफलता से हतोत्साहित न हों

❌ अगर नाद तुरंत सुनाई नहीं देता तो भी रोज़ अभ्यास करें
✅ अभ्यास का संकल्प और समर्पण नाद को आकर्षित करता है


❖ 7. साँस की गति धीमी करें

  • धीमी गहरी श्वास लें

  • साँस का लय मन को शांत करता है

  • जब मन शिथिल होता है, नाद सहज प्रकट होता है

📌 कभी-कभी साँस लेते समय ‘सो’ और छोड़ते समय ‘हम’ का भाव रखें (सोऽहम) — यह प्राकृतिक अजपा जप है, जो नाद तक पहुँचने में सहायक होता है।


❖ 8. नियमितता ही सफलता है

  • नाद सुनना एक प्राकृतिक क्षमता है, अभ्यास से जागती है

  • एक ही समय, एक ही स्थान पर प्रतिदिन बैठें — यह भीतर की स्थिरता को जन्म देता है


❖ पुस्तक में विस्तार से पढ़ें

📘 “अनाहत नाद से समाधि – ध्यान का सहज राजमार्ग” में नाद सुनने की शुरुआत, बाधाएँ और अनुभवों को विस्तृत रूप से समझाया गया है।

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📘 English Version: Awakening with Anahata Naad


❖ निष्कर्ष

अनाहत नाद को सुनना कोई कौशल नहीं — यह एक शांत प्रतीक्षा है।
साधक जब भीतर सुनने के लिए बैठता है और मन को स्थिर करता है — तो ध्वनि स्वयं प्रकट होती है

नाद को सुनना ईश्वर को सुनने की शुरुआत है।

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