अनाहत नाद और चक्रों का संबंध (Anahata Naad & Chakras Connection)
बहुत सारे साधक यह पूछते हैं: “क्या नाद योग (Naad Yoga) का शरीर के चक्रों से कोई संबंध होता है?” उत्तर है — हाँ , और यह संबंध बहुत ही गहरा, रहस्यमय और अनुभवात्मक होता है। जब ध्यान गहराता है और अनाहत नाद (अनहद नाद - Anahata Naad) सुनाई देने लगता है, तो वह केवल कानों से नहीं, बल्कि पूरे शरीर के subtle energy field में कंपन (vibration) पैदा करता है — और यह कंपन सीधे चक्रों (Chakras) पर प्रभाव डालता है। 🌈 नाद और चक्रों के मध्य ऊर्जा-संवाद: 1. मूलाधार (Root Chakra - Muladhara) प्रारंभिक ध्वनियाँ जैसे भारी भौं-भौं , ढोल जैसी ध्वनियाँ अक्सर मूलाधार से जुड़ी होती हैं। यह संकेत है कि चेतना जड़ता से बाहर निकलने लगी है। 2. स्वाधिष्ठान और मणिपुर (Sacral & Navel Chakras) यहाँ जल जैसी तरंगें , धीमे मृदंग , या घुंघरुओं जैसी ध्वनियाँ सुनाई दे सकती हैं। ध्यान की यह अवस्था साधक में inner emotional cleansing लाती है। 3. अनाहत चक्र (Heart Chakra - Anahata) यह वही केंद्र है जहां से अनाहत नाद शब्द आया है। यहाँ सुनाई देती है — घंटी की गूंज , वीणा जैसी लहर , या ओंकार जैसी ध्वनि । ...